Tuesday, 14 February 2012

pwa state confrance kala bhawan purniya me sampann hua.

रेणु’ की धरती पर साहित्यकारों का समागम
- साहित्य की मुख्यधारा प्रगतिवाद है!
- नवसाम्राज्यवाद के खतरे से दुनिया को बचाने का संकल्प!
- लेखक ही अगुवा बनकर समाज को रौशनी दिखायेगा!
- आन्दोलन की कमान युवा पीढ़ी सम्भाले!

    बिहार प्रगतिशील लेखक संघ का 14 वाँ राज्य सम्मेलन पूर्णिया के कमला प्रसाद  नगर (कला भवन) में 11 एवं 12 फरवरी को सम्पन्न हुआ। कलम से दुनिया की जंग जीतने के आगाज एवं युवा रचनाकारों की पुरजोर भागीदारी के साथ चर्चित साहित्यकारों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने कार्यक्रम को एतिहासिक बना दिया। वरिष्ठ आलोचक एवं बीएचयू के पूर्व आचार्य डा. चैथीराम यादव, प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. अली जावेद, म.प्र. प्रलेस के महासचिव विनित तिवारी, कथाकार पुन्नी सिंह, बांग्ला कवि एव बंगाल प्रलेस के महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती, उ.प्र प्रलेस के महासचिव संजय श्रीवास्तव सहित बिहार संगठन के अध्यक्ष डा. व्रजकुमार पाण्डेय, महासचिव राजेन्द्र राजन एवं उपाध्यक्ष डा.पुनम सिंह व राज्य के विभिन्न जनपदों से आये रचनाकर्मी प्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित लेखक-कथाकारों यथा बंगला के मूर्धन्य साहित्यकार सतीनाथ भादुड़ी, उपन्यासकार एवं आंचलिक कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु, अनूपलाल मंडल आदि की समृद्ध विरासत को स्मरण व नमन किया।
    14 वें राज्य सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डा. अली जावेद ने कहा कि हम महान साहित्यकारों - टैगोर, प्रेमचंद, फै़ज,  नागार्जुन, केदार, रेणु आदि की जयन्ती इसलिए मनाते हैं कि हम उनसे प्रेरणा लें, लेकिन पूर्वजों की उपलब्धियों पर हम कबतक अपनी पीठ थपथपाते रहेंगे। आखिर कब हमारी लेखनी का दम बदलाव ला पाएगा। उन्होंने कहा कि परंपराओं का नया रूख कायम करते हुए यह बताना जरूरी हो गया है कि साहित्य पिछलग्गु नहीं बल्कि समाज के निर्माण में अग्रणी पंक्ति का योद्धा है।

No comments:

Post a Comment